छोटे होते लोगों की प्रश्नसूचक निगाह बहुत अचंभित करती थी कि 'अरे दो बेटियाँ ही हैं?' और पापा जानो कोई फर्क ही नहीं पड़ता मुस्कराते हुए बड़े गर्व से कहते-' जी हाँ! मेरी दो बिटिया हैं। और मम्मी! वो तो कहीं हममें ही डूबी, हमें सॅवारती, कुशल कुम्हार सी सांचे में हमें ढालती, घर और कार्य स्थली में गजब का सामंजस्य बिठाती, कहीं हममें शायद खुद को ढूंढती पूरी दुनिया से बेखबर। क्योंकि माँ शब्द को कोई फर्क नहीं पड़ता कि बेटा हैं या बेटी ये फर्क तो दुनिया उसे समझाती हैं । माँ अपने आप में इतना विशाल शब्द हैं कि कहने की बात नहीं कि माँ शब्द हैं तो बच्चा भी शामिल हैं। लेकिन हमारे आसपास के लोग हैरान कि क्या इन्हें बेटे की जरूरत नहीं पर कौन परवाह करें ऐसी बातों की? मम्मी पापा तो सिर्फ और सिर्फ हम दोनों बहनों को दुनिया की भीड़ में मज़बूत योद्धा सा, हर कला में बड़ी चतुराई से बिना हमारे जाने हमें निपुण बनाने में जुटे थे। शिक्षा के साथ चरित्र को सर्वोपरी रखा।
कोई रोक टोक नहीं पर एक अनकहा सा अनुशासन। किसी चीज़ की मनाही नहीं पर फिजूलखर्ची का स्थान नहीं। सबसे बोलने की खुली छूट पर शब्दों के सही चयन पर बेहद पैनी निगाह। सही को सही कहने का साहस और गलत के विरुद्ध खड़े होने की अनूठी हिम्मत दी। 'डर' शब्द जो लोगों ने समझाया हमारे शब्द कोष में कभी रहा ही नहीं।
हाल ही में एक फिल्म देखी 'Pink'. यह फिल्म एक नई सोच की कहानी हैं। नयापन स्त्री का अपने अस्तित्व को सार्थक स्थापित करने का, अपनी इच्छा, अनइच्छा के लिए संघर्ष करने का, सबल रूप के साथ अपने पक्ष को रखने का। लड़को की मानसिकता पर कटाक्ष कर समाज के कुरूप सत्य को उजागर किया इस फिल्म ने। पर यथार्थ के धरातल पर बेटों को मर्यादा का पाठ पढ़ाने की जरूरत बराबर से हैं। अपने अहं में कहीं वो पथ से न भटके इस तरह के अनुशासन में सूतना जरूरी हैं। इस फिल्म में कहीं न कहीं स्वाभिमान, स्वतंत्रता, आत्मविश्वास जैसे शब्दों की आड़ ले, current generation शब्द का पर्दा डलता दिखाई दिया। पर क्या इन शब्दों की चादर ओढ़ हम अपने संस्कारों की धरोहर समेट पाएँगे? खुलेपन की अंधी दौड़ में अपने बच्चों को मर्यादा का अर्थ समझा पाएँगे? बराबरी की रस्साकशी में कहीं घड़ी की सुई character decide न करें सिर्फ इसलिए हमारी बिटिया अनुशासित रहना झुटलाए क्या ये जरूरी हैं? अच्छी अदाकारी एक चीज है और ऐसी फिल्म के माध्यम से संदेश देना अलग। बहुत से प्रश्नचिह्न खड़े दिखते हैं शायद समाधान हर पहलू को टटोलने से दिखाई दे क्योंकि फिल्मकार की तरफ से तो - 'The ball is in your court audience' प्रतीत होता है 😊