जिस बेटे की हर धड़कन के साथ एक माँ का दिल धड़कता हो, जिस बहन का मनोबल, संबल और अधिकार एक भाई के रूप में सख्त ढाल सा खड़ा दिखता हो और जिस स्त्री का सरवस्व जीवन ही व्यक्ति विशेष हो ऐसे में घर के उस पुरुष का नशे जैसे राक्षस से आलिंगनबद्ध होना ऐसा ही है जैसे अंधकार से भरी अंतहीन खाई में घर के पुरुष का समाना।
मन प्रश्न करता हैं कि कौन सा ऐसा कमजोर क्षण होगा कि नशे जैसी तुच्छ प्राय वस्तु एक पुरुष के निर्णय क्षमता को चुनौती दे उसके मस्तिष्क पर आधिपत्य स्थापित कर गई?
मन प्रश्न करता हैं कि कौन सा ऐसा कमजोर क्षण होगा कि नशे जैसी तुच्छ प्राय वस्तु एक पुरुष के निर्णय क्षमता को चुनौती दे उसके मस्तिष्क पर आधिपत्य स्थापित कर गई?
ये बातें पढ़ने में शायद दार्शनिक और फालतू लगे पर कटु सत्य है कि यदि सिर्फ सरकारी आंकड़ो पर नजर दौड़ाई जाएँ तो दिल दहल उठेगा। चाइल्ड लाइन इंडिया फॉउन्डेशन 2014 रिपोर्ट के मुताबिक़ देश में 65 प्रतिशत नशाखोरी से वे युवा ग्रस्त है जिनकी उम्र 18 वर्ष से भी कम है। सरकारी आकड़ों के हिसाब से देश की 70 से 75 प्रतिशत आबादी किसी न किसी प्रकार का नशा करती है और तीन में से एक युवा नशे का आदी है। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात ये कि इसमें महिलाओं और युवतियों की संख्या भी अच्छी खासी हैं।
ये औचक सा गूगल निरिक्षण मैने 'Drug Free Haryana' के अपनी मंच संचालन की तैयारी के लिए किया और हैरान रह गई इन आंकड़ो को देखकर। पुलिस प्रशासन द्वारा हाल ही में अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस मनाया गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर जी ने युवाओं का आह्वान किया। लगभग 1800 युवाओं से भरे गुरु जंबेश्वर विज्ञान और तकनीकी विश्वविद्यालय के सभागार में खड़े हो यू लगा मानो प्रलय का आवेग थमा खड़ा हो। 'We want drug free Haryana' के उदघोष से पूरा सभागार गूंज उठा जिसे देख ऐसा लगा मानो गूगल के ये भयानक से दिखने वाले आकड़े किसी ने मजाक करते हुए सामने रख दिए हो। परंतु सच्चाई बहुत कड़वी हैं। ये आँकड़े समाज के कुरूप रूप को दिखाते भयावह हैं। पर मैं कोई शोध पत्र भी नहीं लिख रही लेकिन एक बात तो निश्चित है 'हमारे बच्चे तो हो ही नहीं सकते' जैसी गलतफहमी वाली मानसिकता को दिमाग से निकालना होगा।
समय की मांग हैं संस्कार रूपी जल जिसे रोज हम अपने बच्चों में सींचते हैं शायद उसकी मात्रा दुगनी कर दी जाए। रिश्तों की डोर की गाँठ और कस कर बांधने की जरूरत हैं। डगमगाते कदमो को मजबूती से संभाल कर थामने की दरकार हैं। प्राथमिकताओं की सूची में परिवार के साथ आत्मीयता, लक्ष्य निर्धारित कर दृण संकल्प के साथ आगे बढ़ना प्रथम सूची में हो।
पुलिस प्रशासन की तरफ से इस तरह के आयोजन की पहल अत्यंत सराहनीय कदम रहा। वर्तमान समय में स्वामी विवेकानंद जैसे युवा शक्ति के साथ संवाद स्थापित करने वाले युवाओं की आवश्यकता हैं जिन्हें नशा हो तो ऊपर उठने का, नशा हो कुछ ऐसा कर गुज़रने का संपूर्ण राष्ट्र गर्व कर सके और नशा हो तो ऐसा कि विश्व में जयजयकार का उदघोष हो हमारे युवाओं के लिए।
पुलिस प्रशासन की तरफ से इस तरह के आयोजन की पहल अत्यंत सराहनीय कदम रहा। वर्तमान समय में स्वामी विवेकानंद जैसे युवा शक्ति के साथ संवाद स्थापित करने वाले युवाओं की आवश्यकता हैं जिन्हें नशा हो तो ऊपर उठने का, नशा हो कुछ ऐसा कर गुज़रने का संपूर्ण राष्ट्र गर्व कर सके और नशा हो तो ऐसा कि विश्व में जयजयकार का उदघोष हो हमारे युवाओं के लिए।
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