Wednesday, 17 August 2016

जिंदा हूँ

फोटो में मुस्कुराना आसान, पर उन्हीं क्षणों को दिल से महसूस कर कभी भी मुस्कुरा लेना मुश्किल। नए फैशन के कपड़े खरीदना आसान, पर उतने ही दर्जे का मन को खूबसूरत रखना बेहद कठिन। हाथों में महंगी घड़ी सजाना आसान, पर वक्त की नज़ाकत को समझ शब्दों को थामना मुश्किल। गहनो की चमक में अपने चरित्र की चमक को बरकरार रखना मुश्किल। इतराना आसान, पर इत्र की तरह महकना मुश्किल। भीड़ के साथ भागना आसान, पर सही को सही कह और गलत को गलत कह भीड़ से अलग खड़े हो इंसान शब्द को सार्थक करना मुश्किल। पढ़ाने की मारा मारी में बचपन के अनमोल क्षणों खोना आसान, उसी बचपन को फिर जीना मुश्किल। और इन सबसे ज्यादा मुश्किल मिट्टी की सौंधी खुशबू से जुड़े रहना जो एहसास कराता हैं कि अभी जिंदा हूँ।

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