अगर घर मे खिलखिलाहट है, अगर घर मे गुनगुनाने की मिठास है, अगर घर मे बोलने की चिड़िया सी चहचहाहट है तो समझ लीजिए घर में बिटिया हैं। घर के द्वार पर रंगों से सजी अल्पना, अंतर्मन को छूती और चेहरे के पृष्ठ पढ़ने की समझ एक बिटिया के अलावा कौन रख सकता हैं? जरा सी जिद कर, पल भर में सिर्फ बिटिया ही मान सकती हैं। शुभकामनाओ सी, एक दिव्य अनुभूति भला कहीं और कहां? गुस्से और परेशानी से भरे दिन की थकान मिटाती ऐसी ठंडक ढूंढने से भी नहीं मिलेगी। स्नेह की एक ऐसी अटूट डोर जो दिल के धड़कने का एहसास कराती है। एक अनुपम, सुखद एहसास जो घर को घर होने की परिभाषा देती हैं।पर पता नहीं क्यों हाल के कुछ दिनों की घटनाओं से मन खिन्न सा हो बहुत बेचैन हैं। अजीब सी घबराहट के साथ एक गुस्सा हैं, न्याय पालिका के खिलाफ, कानून के प्रारूप के खिलाफ। सुबह का अखबार पूरे दिन का खाका तैयार करता हैं और उसी सोच के साथ उस दिन के काम अंजाम होते हैं। पर निर्भया जैसे जघंन्य कांड को अंजाम देने वाले मानसिक रोगियों के पक्ष में कोर्ट का फैसला पढ़ ऐसा लगा मानो पूरी मानवता पर अटट्हास हो रहा है।क्या गुज़रती होगी उस परिवार पर जिस घर की बेटी के साथ ऐसा घिनौने कृत्य को अंजाम दिया गया हो? वो बेटी जिसके हर सपने को उसके साथ उसके माँ और पापा ने भी जिया हो, जिसकी हर खिलखिलाहट के साथ माँ और पापा भी मुस्कुराएँ हो। चरित्र के साथ आत्मसम्मान का हरण कर विभत्स रूप में प्रताड़ित कर मौत के मुँह में पहुँचने वाले इन जघन्य अपराधियों को कानून कैसे बख्श सकता हैं? मन में चीत्कार और हाहाकार मचा हैं। न जाने कितनी युवतियाँ ऐसे दंश झेलती हैं जो ख़बरो का हिस्सा नहीं।
कोई भी आम आदमी कैसे इतना भद्दा खिलवाड़ कर सकता हैं? पर नहीं! कोई भी आम आदमी ऐसा विभत्स रूप नहीं दिखाएगा वो तो बस मूक दर्शक बन अखबार पढ़ेगा या फिर मोर्चा निकाल मोमबत्ती जलाएगा या फिर सोशल मीडिया पर खबर का लिंक शेयर करेगा या फिर मेरी तरह अपनी भड़ास लिख कर निकालेगा। पर क्या यह बहुत हैं? इस तरह के जघंन्य अपराध तो सिर्फ कुंठित मानसिकता का दानव ही अंजाम दे सकता हैं। अगर शरीर का कोई अंग गल कर सड़ांध देने लग जाएँ तो उसे काट कर फैक दिया जाता हैं। कौन है कानून बनाने वाले क्या वो हम में से एक नहीं, क्या कुछ संशोधन कर देना बहुत है, क्यों संवेदनहीन समाज के निर्माण में हम भी भागीदार बन मनुष्यता खो रहे हैं? क्यों टैक्नोलौजी का हमारे बच्चों का ज्ञान, कंप्यूटर में उनकी दक्षता, अंग्रेजी में उनका धारा प्रवाह बोलना हमारे लिए घमंड का विषय हैं? घर से ही एक बालक कई बातें प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों ही रूप से ग्रहण करता हैं। Ethics, moral education and respecting women कुछ ऐसी terms हैं जिनसे familiarise कराना एक माँ के रूप में हमारी नैतिक जिम्मेदारी हैं.....
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