अगर आपसे ये पूछा जाए कि घर मे खिड़की क्यों चाहिए तो लगभग सभी लोग कहेंगे-'अरे भई रौशनी, धूप और हवा के लिए'। पर अपने नए घर के प्रारूप पर विचार करते हुए एक नई ही बात सामने आई खिड़की के स्थान पर अब fixed transparent glass लगेगा जिससे बाहर का दिखेगा तो सब कुछ पर महसूस कुछ नहीं होगा।
खिड़कियाँ अब मंद हवा, सुनहरी गर्म धूप को महसूस कर खुलने वाली नहीं रही सिर्फ बाहर का नजारा देखने के लिए fixed glasses वाली हो गई हैं। हवा, फूलों की खुशबू, चिड़ियो का शोर, इन चीज़ों को महसूस करने की बातें अब पुरानी हो गई हैं
छोटे होते बाहर लौन में लगे रजनीगंधा के फूलों की खुशबू से कमरे के बाहर लगा कूलर पूरे घर को भर देता था। Botany के सारे chapters lawn और kitchen garden में बातो बातों में कब समझ आ जाते थे पता ही नही चलता था। flora, fauna की क्या मज़ाल कि दिमाग से निकल जाए। बे रोक टोक कहीं भी निकल जाते थे। उफ्फ ये खूबसूरत यादें!
पर आजकल स्कूलों में audio visual lab माध्यम रह गया हैं nature को समझने के लिए, घर में या तो बड़ो के लिए time नहीं है या वो साथ नहीं रह रहे है तो संस्कार wall paper पढ़ कर सीखें, soft skills की language lab रह गई हैं भाषा पर परिपक्वता के लिए और facebook दोस्तों के लिए।
आजकल दोस्त और रिश्ते बाहर से दिखने में साफ crystal clear पर बगैर हवा के से, तन्हा, घुटन से भरे हो गए हैं जो न तो दिल को छूते हैं, न महसूस होते हैं बस दिखते भर हैं। आइये इन बौने होते रिश्तों को प्यार की फुहार, अपनेपन और बड़प्पन की धूप, कुछ पुरानी बातें भूल वर्तमान में बाहे फैलाकर सिर्फ खूबसूरत यादों को समेटे एक नई शुरूआत करे, नहीं तो शायद वो दिन भी दूर नहीं जब रिश्तों की ही तरह खिड़कियो की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए भी virtual screens लगा दिए जाएंगे ...
आजकल दोस्त और रिश्ते बाहर से दिखने में साफ crystal clear पर बगैर हवा के से, तन्हा, घुटन से भरे हो गए हैं जो न तो दिल को छूते हैं, न महसूस होते हैं बस दिखते भर हैं। आइये इन बौने होते रिश्तों को प्यार की फुहार, अपनेपन और बड़प्पन की धूप, कुछ पुरानी बातें भूल वर्तमान में बाहे फैलाकर सिर्फ खूबसूरत यादों को समेटे एक नई शुरूआत करे, नहीं तो शायद वो दिन भी दूर नहीं जब रिश्तों की ही तरह खिड़कियो की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए भी virtual screens लगा दिए जाएंगे ...
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